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Mahanadi Basin Newsletter
Volume 2, Issue 1
July-September, 2016
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२०१४ से अब तक, महानदी घाटी न्यूजलेटर के चार अंक ऑनलाइन प्रकाशित हुए हैं| न्यूजलेटर की शुरुवात इस उद्देश्य से हुई की महानदी घाटी के हितधारकों के साथ फोरम के चल रहे अध्ययन के परिणामों को बांट सके| फोरम का यह भी मानना है कि न्यूजलेटर हितधारकों के साथ संवाद और संबंध बनाये रखने के लिये एक अच्छा माध्यम है और साथ ही साथ पानी के विषयों में रूचि रखने वालों का नेटवर्क और मजबूत हो जायेगा|
 
फोरम के चार साल से चल रहे अध्ययन का यह अंतिम वर्ष है| अभी तक तीनों विषयगत गटोंका काम, लगभग पूरा हो चूका हैं| हर गट ने प्राथमिक और माध्यमिक डेटा के आधार पर विस्तृत विशेल्शन किया है| इस अभ्यास के परिणामों को महानदी घाटी के हितधारकों के साथ एक दिवसीय मीटिंग में प्रस्तुत किया गया| यह मीटिंग रायपुर में ११ अगस्त को आयोजित की गयी थी| महानदी के पानी के आवंटन को लेकर ओड़िशा और छत्तीसगढ़ के बीच मतभेद चल रहे है| यह मीटिंग इस विवाद पर चर्चा और हल निकालने के लिये एक अच्छा मौका था और उपस्थित लोगों ने इसका लाभ भी उठाया| इस मीटिंग का एक ‘प्रेस नोट’ भी तैयार किया गया और यह फोरम के वेबसाइट पर उबलब्ध है| 
 
न्यूजलेटर के इस अंक में तीन लेख लिखें गये हैं| पहला अंक, ई-फ्लो विषय पर काम कर रहे गट से, नेहा भडभडे ने लिखा है| यह लेख हसदेव उपघाटी में बांध से प्रभावित समुदाय का विश्लेषण करता है| दूसरा और तीसरा लेख, अभिषेक पाटने ने लिखें हैं| अभिषेक ‘टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस’ में पढ़ रहा है और उसने फोरम के साथ दो महीने के लिये इंटर्नशिप किया था| इंटर्नशिप के दौरान उसने महानदी घाटी में छपे हुए खबरों और ऑनलाइन मीडिया से अलग अलग संघर्षों और विवादों पर जानकारी हासिल की| साथ ही खारून रिवरफ्रंट प्रकल्प, जो रायपुर के पास खारून नदी पर बनने जा रहा है, उसका विस्तार से अभ्यास किया| ये दो लेख इसी अभ्यास पर आधारित हैं|
 
पाठकों से निवेदन हैं कि आप अपने विचार और सुझाव हमें जरूर भेजे| साथ ही फोरम आपको प्रोत्साहित करता है कि यदि आप महानदी घाटी में या देशभर में चल रहे पानी से संबंधित संघर्ष की जानकारी रखते हैं, तो हमें लेख लिखकर जरूर भेज दीजिये| आपके भेजे गये लेख को हम आनेवाले अंकों में जरूर प्रकाशित करेंगे| 
 
संपादकीय टीम